SHORT TERM PROFFECTIONAL DEVELOPMENT PROGRAMME

अच्छी किताब ही अच्छी संस्कृति का निर्माण करती है- प्रो. संजय तिवारी

भोपाल 14 जुलाई। मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय में आज से तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ इस कार्यशाला का विषय है "दूरस्थ और ऑनलाइन शिक्षा के लिए स्वर अधिगम सामग्री का अभिकल्पन और विकास"। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में शिक्षा जगत के अनेक दिग्गजों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। तीन दिवसीय इस कार्यशाला का आयोजन मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय भोपाल के सभागार में किया जा रहा है। कार्यशाला में भाग लेने लिए लगभग 300 से ज्यादा विभिन्न संकाय के अनेक प्राध्यापकों और लेखकों ने ऑनलाइन- ऑफलाइन पंजीयन करवाए।

सत्र की शुरुआत मुख्य अतिथि के उद्बोधन से हुई। प्रो. केजी सुरेश, कुलपति, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय ने अपने वक्तव्य में कहा की ऑनलाइन शिक्षा के बारे में कोरोना काल से हमारी सोच में काफी बदलाव आया है। कोरोना काल में ही हमें इसके महत्व के बारे में पहली बार समझ आया है। भारत के सभी शिक्षकों ने इसी कोरोना काल में ऑनलाइन माध्यम से विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुंचाई है। शिक्षक भी कोरोना वारियर से कम नहीं हैं। प्रो . सुरेश ने कहा की ऑनलाइन माध्यम के द्वारा हम विश्व के किसी भी प्रतिष्ठित विद्वान शिक्षक या वैज्ञानिक को हमारे क्लासरूम तक ला सकते हैं, वह भी बहुत कम खर्चे में। ऐसा केवल इस माध्यम के द्वारा ही हो सकता है। आज शिक्षा को ऑनलाइन माध्यम ने लाइफ लोंग लर्निंग में बदल दिया है। प्रोफेसर सुरेश ने कहा कि पहले ओपन एजुकेशन के बारे में जनता में कई भ्रांतियां थी, लेकिन आज वही ओपन और मुक्त शिक्षा को काफी अच्छी नजर से देखा जाता है।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में सारस्वत वक्ता के रूप में उपस्थित प्रोफेसर संतोष कुमार पांडा, निदेशक , इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय ने कहा की भोज विश्वविद्यालय की बुनियाद इसके पूर्ववर्ती कुलपतियों ने बहुत अच्छी रखी है; और इस विश्वविद्यालय की भूमिका नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में भी अग्रणी रहेगी, ऐसी आशा है। उन्होंने कहा कि हमें अंग्रेजी से प्रभावित शिक्षा प्रणाली का बहुत फायदा हुआ है किंतु इसका एक नुकसान यह भी हुआ है की ऐसे शोध और विकास कार्य जो अंग्रेजी भाषा के अलावा दूसरी भाषा में हुए हैं उससे हम वंचित रहे हैं।

डॉ संतोष पांडे ने शिक्षकों का आवाह्न करते हुए कहा कि आपको राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है और यह कार्यशाला स्व अधिगम पाठ्य सामग्री के विकास में आपको उचित कौशल प्रदान करेगी।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉक्टर अनिल कोठारी ने कहा कि यह कार्यशाला एक गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्री बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी आज मुक्त और दूरस्थ शिक्षा का जमाना है और नई शिक्षा नीति के अनुसार दूरस्थ और मुक्त शिक्षा के माध्यम से शिक्षा प्रदान करना बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें अधिगम पाठ्य सामग्री का निर्माण एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है उन्होंने कहा गुरु रास्ते बताता है किंतु उस पर चलना तो आपको ही पड़ता है। कार्यक्रम के अतिथि प्रोफेसर एन एन राव निदेशक वेस्टर्न रीजनल रिसर्च सेंटर फॉर इंस्ट्रूमेंटेशन ने कहा कि हमारा केंद्र छोटे-छोटे उपकरणों के माध्यम से विज्ञान के कई सिद्धांतों को बच्चों को आसानी से समझाने के लिए विकसित कर रहा है। डॉ. कोठरी ने अधिगम पाठ्य सामग्री के विकास के संबंध में कहा कि हमें ऐसे छोटे-छोटे मॉडल विकसित करना चाहिए जिससे बच्चे घर पर भी प्रैक्टिकल के रूप में करके विज्ञान के सिद्धांतों को सीख सकें उन्होंने कहा कि उनका संस्थान स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम चला रहा है।

उद्घाटन कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर संजय तिवारी ने कहा कि "किताब को एक शिक्षक की तरह कार्य करना चाहिए" यही अधिगम सामग्री की मूल अवधारणा है। पाठ्य सामग्री की विषय वस्तु ऐसी हो जो विद्यार्थी को आनंदित करने के साथ-साथ उसको विजुलाइज करने के लिए भी बात कर सके। उन्होंने कहा कि पुस्तकों का महत्व कभी कम नहीं होने वाला है। शिक्षा देश की रीढ़ की हड्डी है। तिवारी ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि भारत देश में शोध और विकास पर हमारे जीडीपी का केवल 0.5% खर्च किया जाता है किंतु इतने कम बजट के बावजूद भी हमारे वैज्ञानिकों ने देश को इतनी तरक्की प्रदान की है। उन्होंने कहा कि आज 3p ( पेटेंट , पब्लिश और प्रोस्पर ) अवधारणा प्रचलित है। डॉ. तिवारी ने कहा कि आज देश में दूरस्थ और मुक्त शिक्षा तथा ऑनलाइन शिक्षा का भविष्य बहुत अच्छा है इन शिक्षा पद्धति की सफलता उनके अधिगम पाठ्य सामग्री की गुणवत्ता पर निर्भर करती है इस कार्यशाला के माध्यम से अध्यापकों को गुणवत्तापूर्ण अधिगम पाठ्य सामग्री के निर्माण की कुशलता प्राप्त होगी। जिससे वे भविष्य में गुणवत्तापूर्ण पाठ्य सामग्री का निर्माण कर सकेंगे और राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने में अपना विशेष योगदान दे सकेंगे।

इसके पूर्व कार्यक्रम में कार्यशाला के समन्वयक और विश्वविद्यालय के एकेडमिक समन्वय विभाग के निदेशक प्रोफेसर उत्तम सिंह चौहान ने कार्यशाला के उद्देश्य के बारे में जानकारी दी और विषय प्रवर्तन किया। कार्यक्रम का संचालन भोज मुक्त विश्वविद्यालय की उप निदेशक डॉ अनीता कौशल ने किया। उद्घाटन सत्र के अंत में धन्यवाद ज्ञापन मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा द्वारा दिया गया।

कार्यशाला में उच्च शिक्षा विभाग, आर. आई. ई. भोपाल एवं विश्विद्यालय के प्राध्यापकों ने बड़ी संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।